September 20, 2020

अफीम किसानों को केन्द्र सरकार का बंपर गिफ्ट

-अब केवल मार्फीन की मात्रा की ही होगी जांच

-केन्द्र सरकार ने नीति संशोधन का नोटिफिकेशन जारी

मंदसौर। सांसद सुधीर गुप्ता के प्रयासों से संसदीय क्षैत्र सहित सभ अफीम किसानों को एक बड़ा तोहफा प्राप्त हुआ है। राख या अन्य पदार्थों के मिश्रण के नाम पर अफीम घटिया हो जाने की आशंका से अब किसानों को मुक्ति मिलने जा रही है।

सांसद श्री गुप्ता की पहल पर इस संबंध में केन्द्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब अफीम की फेक्टरी जांच में केवल मार्फीन की मात्रा की जांच की जाएगी।

किसानों की अफीम में निर्धारित स्तर की मार्फीन प्राप्त हो जाती है, तो फिर उन्हें अन्य किसी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस तरह अन्य किसी मिलावट के नाम पर उनके पट्टे घटिया की श्रेणी में शामिल नहीं होंगे।

आधिकारिक रूप से मिली जानकारी के अनुसार वित्त विभाग के राजस्व विभाग द्वारा 15 मई 2017 को जारी किए गए गजट नोटिफिकेशन में निर्धारित किया गया कि स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ नियमावली 1985 के नियम 8 के अनुपालन में केन्द्र सरकार का एतद द्वारा वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की अधिसूचना संख्या 2/2016 के दिनांक 20 अक्टूबर 2016 में पैराग्राफ 5 (4) में निम्नलिखित को प्रतिस्थापित किया जाएगा।

फसल वर्ष 2016-17 के वे अफीम कृषक अगली फसल वर्ष अर्थात 2017-18 में लाइसेंस के लिए पात्र नहीं होंगे जिनकी फसल वर्ष 2016-17 की अफीम को सरकारी अफीम एवं क्षारोद कारखाना नीमच या गाजीपुर ने अपमिश्रित या घटिया किस्म का पाया है।

सरकारी अफीम एवं क्षारोद कारखाना नीमच या गाजीपुर किसी भी अफीम को घटिया किस्म की घोषित कर देंगे, यदि उसमें मार्फीन का अंश शुष्क आधार पर 9 प्रतिशत या उससे कम पाया जाता है।

इस नोटिफिकेशन से स्पष्ट है कि अब अफीम की शुद्धता के लिए केवल मार्फीन का प्रतिशत ही देखा जाएगा। 9 प्रतिशत से कम मार्फीन वाली अफीम घटिया मानी जाएगी।

पूर्व के वर्षों में अफीम की शुद्धता के लिए राख की मात्रा, मिल्क पाउडर, बोर्नविटा, गोंद आदि कारकों को भी देखा जाता था। यह कारक कई बार किसानों के असंतोष का कारण बनते थे। किसानों की मांग पर सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने इस बात को वित्त मंत्रालय में मजबूती से रखते हुए हवाला दिया था कि विभाग को केवल अफीम में मार्फीन चाहिए होती है, इसलिए मानक भी उसी का तय होना चाहिए।

आधिकारिक स्तर पर परीक्षण में भी सांसद श्री गुप्ता की इस बात को बल देते हुए विभागीय स्तर पर सहमति व्यक्त की गई थी। इसके बाद सांसद श्री गुप्ता ने सतत रूप से वित्त मंत्रालय में इस बात को मजबूती से रखा।

जिसके परिणाम इस संशोधन के रूप में सामने आए हैं। अब मार्फीन के प्रतिशत अच्छा देने वाले किसानों को और किसी डर का सामना नहीं करना होगा।
एफटीएनआईआर मशीन से होगी जांच

किसानों के लिए प्रसन्नता की बात यह भी है कि अब अफीम की जांच पुरानी पद्धति से ना होकर एफटीएनआईआर मशीन से होगी। इससे जांच रिपोर्ट तीन से चार घंटे के भीतर ही आ जाएगी। किसानों को अफीम जांच के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस जांच पद्धति के लिए भी सांसद श्री गुप्ता सतत रूप से प्रयत्न कर रहे थे। इस तरह एक साथ  दो बड़ी राहत सांसद श्री गुप्ता के प्रयासों से अफीम किसानों को केन्द्र सरकार के तीन वर्ष पूर्ण करने पर प्राप्त हुई है।
दो दिन में दो बड़ी सौगातों का संयोग

इसे संयोग या अथक परिश्रम का परिणाम की कहा जाएगा कि दो दिनों में दो बड़ी सौगातें मंदसौर संसदीय क्षैत्र को प्राप्त हुई है। एक दिन पूर्व ही मंदसौर जिले को 800 करोड़ की उद्वहन सिंचाई योजना का लाभ प्राप्त हुआ था।

दो संभागों की सबसे बड़ी यह योजना किसानों के लिए मिल का पत्थर साबित होगी। साथ ही इस योयना में पेयजल के लिए भी 45 एमसीएम पानी का प्रावधान किया जाएगा। इसके अगले ही दिन अफीम किसानों के हित में आए निर्णय से संसदीय क्षैत्र को संसदीय कार्यकाल के तीन वर्षों के दो बड़े तोहफे प्राप्त हो गए हैं।